रेगुलेटिंग एक्ट 1773 की कमियों को पूरा करने के लिए 1781 में एक संशोधन अधिनियम लाया गया उसके बाद 1784 में पिट्स इंडिया एक्ट लाया गया।
इस एक्ट से संबंधित कानून ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री पीट द अयंगर ने संसद में प्रस्तुत किया था तथा 1784 में इसे पारित कर दिया गया।
इस एक्ट की निम्नलिखित विशेषताएं थी-
1. इस अधिनियम के तहत कंपनी के राजनीतिक तथा व्यापारिक मामलों का अलग अलग कर दिया गया
2. व्यापारिक मामलों के लिए कोर्ट ऑफ डायरेक्टर तथा राजनीतिक मामलों को बोर्ड ऑफ कंट्रोल कंट्रोल का गठन किया गया
3. Board of Control में 6 कमिश्नर हुआ करते थे, जिसे भारत में संपूर्ण अंग्रेजी आधिपत्य क्षेत्र का अधिकार दिया गया।
4. 6 सदस्य में से एक ब्रिटेन का अर्थ मंत्री हुआ करता था तथा एक विदेश सचिव हुआ करते थे तथा चार अन्य ब्रिटेन के सम्राट द्वारा चुने जाते थे जो पृवी काउंसिल के मेंबर हुआ करते थे
5. Board of Control को यह शक्ति दी गई की ब्रिटिश नियंत्रितभारत में सभी नागरिक सैन्य सरकार व राजस्व गतिविधियों का अधीक्षण व नियंत्रण करें
6. कंपनी के प्रशासन व कार्य पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान किया गया
7. भारत में गवर्नर जनरल के परिषद में सदस्यों की संख्या 4 थी जिसे घटाकर तीन कर दिया गया
इनमें से एक पद सेनापति को दे दिया गया
8. मुंबई तथा मद्रास के गवर्नर को पूर्ण रूप से गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया
9. देसी राजाओं से संधि अथवा युद्ध के पहले गवर्नर जनरल को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की स्वीकृति लेना अनिवार्य हो गया था
10. भारत में अंग्रेज अधिकारियों के ऊपर मुकदमा चलाने के लिए एक अलग कोर्ट इंग्लैंड में बनाया गया था
11. संचालक मंडल द्वारा तैयार किए जाने वाले पत्र व ज्ञान नियंत्रण बोर्ड के सम्मुख रखना अनिवार्य कर दिया गया था
12. नियंत्रण बोर्ड इसमें बदला भी कर सकती थी
1786 का अधिनियम:-
1. इसमें गवर्नर जनरल को और अधिक शक्तिशाली बना दिया गया इसके तहत सेनापति का अधिकार भी गवर्नर जनरल को दे दिया गया
2. बोर्ड ऑफ कंट्रोल ऑफ कंट्रोल के निर्णय को रद्द अथवा लागू कर सकते थे