Tuesday, 10 July 2018

Act of settlement 1781

संशोधन अधिनियम 1781
Act of settlement 1781
» यह एक्ट 1773 की कमीयो को को दूर करने के लिए लाई गई थी
कारण:-
     इस एक्ट को लेन का वजह यह था की गर्वनर जनरल और सर्वोच्च न्यायालय के बीच पटना और काशीचुरा केस के वजह से  काफी मतभेद  हो गया था
» गर्वनर जनरल के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी (officers) तथा स्थानीय जमींदार भी सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के ख़िलाफ़ थे
»गर्वनर जनरल ने सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ एक  दर्ज करवाई ।
» संसद द्वारा सारे केस study करने के बाद ब्रिटिश सरकार ने एक किमीटि का गठन किया
     जिसे touchet committee (टौचेत समिति) का गठन किया जिसका कार्य केस की मुआइना करना था
»इस committee ने 1781 में जो रिपोर्ट ब्रिटिश सरकार को दिए उसे 1781 के संशोधन अधिनियम का आधार मन लिया

» इस एक्ट के तहत गर्वनर जनरल के फैसले का महत्व सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से अधिक हो गया क्योंकि
गर्वनर जनरल सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को टाल सकता था।
इस एक्ट के मुख्य अभिलक्षण :-
» 1773 के कमियो को दूर करने के लिए लाया गया था
»पटना और काशीचुरा के कैदियों को रहत मिली जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने सजा सुनाई थी
» गवर्नर जनरल ईस्ट इंडिया कंपनी तथा जमींदारों के अधिकारो को सुरक्षित कर दिया जो।सर्वोच्च न्यायालय के अंदर आते थे
» इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य यह था की गर्वनर जनरल तथा सर्वोच्च न्यायालय के बीच मतभेद को खत्म क्र दिया गया।
»  गर्वनर जनरल सर्वोच्च न्यायालय के आदेशो को टाल सकते थे या खत्म कर सकते थे
»राजस्व को एकत्रित करने में सर्वोच्च न्यायालय  कोई बढ़ा नही  डाल सकती थी क्योंकि राजस्व से सम्बंधित कोई भी फैसला सर्वोच्च न्यायालय नही कर सकती थी
» जमींदारो को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र
से बाहर रखा गया।
» ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी भी सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर थे
»क़ानून बनाते समय या क्रियान्वित करते समय भारतीयो के रीती- रिवाज का सम्मान किया जाना चाहिए

Monday, 9 July 2018

रेगुलेटिंग अधिनियम 1773, historical background of Indian polity

                   

                        रेगुलेटिंग एक्ट 1773
रेगुलेटिंग एक्ट(अधिनियम) ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया पहला कदम था जिसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को नियंत्रित व् नियमित किया गया
» इस एक्ट के तहत पहली बार कंपनी के द्वारा किये गए कार्यों को मान्यता मिली और इसके द्वारा भारत में केंद्रीय प्रशासन की नीव रखी गई
      जिसके तहत मद्रास तथा बम्बई  आदि प्रान्तों को बंगाल के अधीन कर दिया गया
» इस एक्ट के बाद बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल कहा जाने लगा और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद् का गठन कर दिया गया
» कंपनी से कहा गया की राजस्व से सम्बंधित सभी मामले, दीवानी एवं सैन्य प्रशासन से संबंधित सभी कार्यों से सरकार को अवगत कराये।
» कानून बनाने का अधिकार गवर्नर जनरल तथा उसके परिषद् को दे दिया गया हालांकि कानून लागु करने से पहले भारत सचिव से अनुमती लेना आवशयक था।
» लार्ड वारेन हेस्टिंग पहले गवर्नर जनरल बने(बगाल के अंतिम गवर्नर भी थे) थे। इनके परिषद में चार सदस्य मानसल, क्लेवरिंग, बरवैल तथा फिलिप फ्रांसिस थे
» ईस्ट इंडिया कंपनी को एक 24 सदस्यों की टीम द्वारा संचालित किया जाता था जिसे court of director (संचालक मंडल) कहा जाता था। इसे गवर्निंग बॉडी भी कहा जाता था। 500 paund अंशधारी (शेयर  होल्डर) को ही अब संचालक चुनने के अधिकार दिया गया
» इस एक्ट के तहत company के कर्मचारियो को निजी व्यापर अथवा भारतीय लोगो से घुस, नजराना, उपहार को रिश्वत के रूप में लेने से मना कर दिया गया हालांकि वेतन में बढ़ोतरी की थी
» इस एक्ट के तहत कोलकता में एक सर्वोच्च न्यान्यालय का स्थापना हुआ जिसमे 1 मुख्य न्यायाधीश तथा 3 अन्य न्यायाधीश थे
पहले मुख्य न्यायाधीश का नाम सर एलिजा एम्पी था।
» 1781 में संशोधन अधिनियम आया जिसमे कलकत्ता के उच्चतम न्यायालय के अधिकार परिभाषित कर दिया गया (उसकी अधिकार सिमा को)
» राजस्व एकत्रित करने में बाधा न डाली जा सकती थी
» कानून बनाते वक्त भारतीयो के सामाजिक अथवा धार्मिक भावनाओ का सम्मान किया जाये


Sunday, 8 July 2018

भारतीय राजव्यवस्था का परिचय

Indian polity अर्थात राज व्यवस्था को समझने के लिए हमलोगो को अजादी से पहले के शासन व्यवस्था को समझना आवश्यक है। कैसे अग्रेजो द्वारा भारत के शासन व्यवस्था को रेगुलेट अथवा नियंत्रित किया गया
आजादी से पूर्व अग्रेजो द्वारा दो तरह से शासन किया गया
1 company rule
   कंपनी का शासन
   (1773 ई० - 1857 ई०)
2 crown rule
   ताज का शासन
   (1858 ई० - 1947 ई०)
» ब्रिटिश शासन में शासन को चलाने के लिए  समय समय पर  रेगुलेटिंग एक्ट, चार्टर एक्ट, भारतीय परिषद् अधिनियम, भारत शासन अधिनियम आई और अंत में  स्वतंत्रता अधिनियम 1947 में पारित हुआ
इनमे से कुछ अधिनियमो को समझना आवश्यक है जो इस प्रकार है  :-
» रेगुलेटिंग एक्ट 1773
»1813 का चार्टर अधिनियम
»1833 का चार्टर अधिनियम
»1853 का चार्टर अधिनियम
»1858  का अधिनियम
»1861 का भारतीय परिषद् अधिनियम
»1892 का भारतीय परिषद् अधिनियम
»1909 का भारतीय परिषद् अधिनियम
»1919 का भारतीय परिषद् अधिनियम
» 1935 का भारत शासन अधिनियम
»भारत का स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

              इसके अलावे समय-समय पर कुछ सुधार एक्ट भी लाये गए हमलोग उसे भी साथ में ही पढ़ेंगे।
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