Monday, 9 July 2018

रेगुलेटिंग अधिनियम 1773, historical background of Indian polity

                   

                        रेगुलेटिंग एक्ट 1773
रेगुलेटिंग एक्ट(अधिनियम) ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया पहला कदम था जिसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को नियंत्रित व् नियमित किया गया
» इस एक्ट के तहत पहली बार कंपनी के द्वारा किये गए कार्यों को मान्यता मिली और इसके द्वारा भारत में केंद्रीय प्रशासन की नीव रखी गई
      जिसके तहत मद्रास तथा बम्बई  आदि प्रान्तों को बंगाल के अधीन कर दिया गया
» इस एक्ट के बाद बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल कहा जाने लगा और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद् का गठन कर दिया गया
» कंपनी से कहा गया की राजस्व से सम्बंधित सभी मामले, दीवानी एवं सैन्य प्रशासन से संबंधित सभी कार्यों से सरकार को अवगत कराये।
» कानून बनाने का अधिकार गवर्नर जनरल तथा उसके परिषद् को दे दिया गया हालांकि कानून लागु करने से पहले भारत सचिव से अनुमती लेना आवशयक था।
» लार्ड वारेन हेस्टिंग पहले गवर्नर जनरल बने(बगाल के अंतिम गवर्नर भी थे) थे। इनके परिषद में चार सदस्य मानसल, क्लेवरिंग, बरवैल तथा फिलिप फ्रांसिस थे
» ईस्ट इंडिया कंपनी को एक 24 सदस्यों की टीम द्वारा संचालित किया जाता था जिसे court of director (संचालक मंडल) कहा जाता था। इसे गवर्निंग बॉडी भी कहा जाता था। 500 paund अंशधारी (शेयर  होल्डर) को ही अब संचालक चुनने के अधिकार दिया गया
» इस एक्ट के तहत company के कर्मचारियो को निजी व्यापर अथवा भारतीय लोगो से घुस, नजराना, उपहार को रिश्वत के रूप में लेने से मना कर दिया गया हालांकि वेतन में बढ़ोतरी की थी
» इस एक्ट के तहत कोलकता में एक सर्वोच्च न्यान्यालय का स्थापना हुआ जिसमे 1 मुख्य न्यायाधीश तथा 3 अन्य न्यायाधीश थे
पहले मुख्य न्यायाधीश का नाम सर एलिजा एम्पी था।
» 1781 में संशोधन अधिनियम आया जिसमे कलकत्ता के उच्चतम न्यायालय के अधिकार परिभाषित कर दिया गया (उसकी अधिकार सिमा को)
» राजस्व एकत्रित करने में बाधा न डाली जा सकती थी
» कानून बनाते वक्त भारतीयो के सामाजिक अथवा धार्मिक भावनाओ का सम्मान किया जाये


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