Friday, 16 November 2018

Charter act 1833

1833 का चार्टर अधिनियम की विशेषताएं:-

1. भारतीय प्रदेशों तथा राजा सुपर कंपनी के अधिकारों को 20 वर्षों के लिए और बढ़ा दिया गया हल्ला किया निश्चित किया गया कि भारतीय प्रदेशों का शासन ब्रिटिश सम्राट के नाम से किया जाएगा।

2. चीन के साथ व्यापार एवं चाय के व्यापार में कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया।

3. ईसाई मिशनरियों को अधिकार यह दिया गया कि अब वह भारत में बिना लाइसेंस के जा सकते हैं।

4. अंग्रेजों को भारत में जमीन बेचने तथा खरीदने का अधिकार दिया गया वह भी बिना किसी अनुमति पत्र के।

5. भारत में सरकार का वित्तीय विधाई तथा प्रशासनिक रूप से केंद्रीकरण का प्रयास किया गया।

6. बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल भी बना दिया गया।

*Lord William Bentinck भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे

7. गवर्नर जनरल को कंपनी के सैनिक तथा और सैनिक कार्यों को नियंत्रित करने का अधिकार दिया गया।

8. कानून बनाने की शक्ति सिर्फ गवर्नर जनरल तथा उसके सहयोगी परिषद को दिया गया।

9. गवर्नर जनरल के परिषद में सदस्यों की संख्या को 3 से बढ़ाकर 4 कर दी गई तथा चौथा सदस्य विधि सदस्य के रूप में नियुक्त हुए।

*  पहले विधि सदस्य मैकाले थे तथा इनकी नियुक्ति ब्रिटेन के सम्राट द्वारा कि जाती थी।

10. भारतीयों के रीति-रिवाजों को स संहिताब्ध्य किया गया किया गया।

11. दास प्रथा को गैर कानुनी घोषित  कर दिया गया।

12. गवर्नर जनरल तथा परिषद के द्वारा बनाया जाने वाला कानून की जांच पड़ताल के लिए एक समिति का गठन हुआ जिसे भारतीय विधि आयोग कहा गया।(इस आयोग का गठन भी लॉर्ड विलियम बेंटिक यानी कि गवर्नर जनरल के द्वारा ही किया गया था)

13. प्रांतों के गवर्नर को किसी भी परिस्थिति में कोई कानून बनाने का अधिकार नहीं दिया गया लेकिन वह कानून के प्रारूप को तैयार कर गवर्नर जनरल के पास भेज सकते थे जिसे गवर्नर जनरल रद्द कर सकते थे या उसे लागू भी कर सकते थे।

14. वित्तीय मामले में भी प्रांतों के गवर्नर को कोई अधिकार नहीं दिया गया।

15. बंगाल के लिए एक डिप्टी गवर्नर का पद लाया गया।

16. टैक्स लगाने का अधिकार भी गवर्नर जनरल को दे दिया गया।

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Thursday, 15 November 2018

Charter act 1813

एक्ट की विशेषताएं:-

1. भारत के साथ और 20 वर्षों के लिए व्यापार का अधिकार मिल गया, East India Company को चाय का व्यापार तथा चीन के साथ व्यापार करने का एकाधिकार दिया गया।

2. पादरियों को यह अधिकार दिया गया कि वह ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार कर सकते हैं तथा पाश्चात्य सभ्यता का भी प्रसार करें।

3. शिक्षा का बजट बना जिसके तहत 100000 पाउंड दिया गया ।

4. व्यापारी खाता तथा शासन संबंधी खाता को अलग कर दिया गया।

5. Board of Control को और शक्ति प्रदान किया गया ताकि कंपनी पर नियंत्रण और अधिक मजबूती से स्थापित किया जा सके

6. अन्य अंग्रेज व्यापारी तथा इंजीनियर को को भारत आने का अधिकार दिया गया लेकिन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से लाइसेंस लेना अनिवार्य था यदि किसी विशेष परिस्थिति में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर लाइसेंस नहीं देते हैं तो वे लोग व्यापार का लाइसेंस बोर्ड ऑफ कंट्रोल से ले सकते थे।

7. कर को भारत की आम जनता पर लगाया गया तथा कहां गया की यदि tax कोई भी चोरी करेंगे तो उन्हें दंडित किया जाएगा

8. सैनिकों से संबंधित नियम कानून बनाने का अधिकार भी कंपनी को दे दिया गया।

9. अंग्रेजों की आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी गिरजाघर खोला जाना चाहिए।

10. भारतीय राजस्व से कंपनी के भागीदारों शेयर होल्डर को अब सिर्फ 10.5 प्रतिशत ही लाभ दिया जाता था।

♦इस एक्ट का प्रभाव:–

1. भारतीयों का शोषण अधिक तेजी से होना आरंभ हो गया

2. अगले 50 वर्षों में 7 गुना अधिक मुनाफा कमाया।

3. लाखों भारतीयों को ईसाई धर्म में बदले गया।

4. ईसाई शिक्षा और संस्कृति का अनुसरण बढ़ना शुरू हो गया

5. लघु– कुटीर उद्योग नष्ट होते चले गए।

    By– अनुराग झा

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Sunday, 11 November 2018

1793 का चार्टर अधिनियम

यह अधिनियम शासन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए लाया गया था

अधिनियम की विशेषताएं:-

1. कंपनी को 20 वर्षों के लिए और भारत के साथ व्यापार करने का अनुमति मिल गया

2. कंपनी के आय का एक अनुमान लगाया गया कि कंपनी की आय प्रति वर्ष सारे 12.5 lakh pound है जिसमें 5 lakh पाउंड कर्ज चुकाने के लिए तथा शेष राशि को कंपनी के शेयर होल्डर के बीच बांट ने के लिए दिया गया

3. बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों को अब वेतन भारत के संचित निधि से दिया जाने लगा

4. सभी प्रांतों के लिए एक गवर्नर की नियुक्ति की गई तथा गवर्नर जनरल के लिए तीन सदस्यों का एक परिषद बनाया गया जो गवर्नर जनरल को सहायता प्रदान करती थी

5. गवर्नर जनरल को या अधिकार दिया गया कि वह किसी भी अधिनियम को रोक सकते थे लेकिन यदि बोर्ड ऑफ कंट्रोल न्याय से संबंधित या कर से संबंधित या विधि से संबंधित कोई भी अधिनियम पारित करें अथवा रद्द करें तो गवर्नर जनरल से नहीं रोक सकते थे

6. गवर्नर जनरल को यह अधिकार दिया गया कि वह सैनिक तथा और असैनिक मामला अथवा किसी राजस्व से संबंधित अथवा किसी देशी रियासत से संधि अथवा युद्ध से संबंधित कोई फैसला ले सकते थे

7. गवर्नर जनरल, प्रांतों के गवर्नर या प्रधान सेनापति या कंपनी का कोई उच्च अधिकारी या सुप्रीम कोर्ट का कोई उच्च अधिकारी जब तक अपने पद पर हैं तब तक वह भारत से बाहर नहीं जा सकते यदि वह भारत से बाहर जाते हैं तो उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है ऐसा मान लिया जाएगा

8. प्रधान सेनापति को अब काउंसिल का मेंबर होना अनिवार्य नहीं था।

9. यदि किसी कार्य से गवर्नर जनरल बाहर जाते हैं तो उनका कार्यभार कौन संभालेगा यह निर्णय भी गवर्नर जनरल को ही करना होगा

10. समुद्र में व्यापार करने की आजादी मिल गई

11. गवर्नर जनरल तथा उसके काउंसिल को अब प्रिवी कौंसिल का मेंबर होना अनिवार्य नहीं था

12. इस अधिनियम द्वारा श्रेष्ठता का सिद्धांत लाया गया

13. क्योंकि शराब मादक पदार्थ था इसलिए शराब बेचने के लिए अब लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया

14. साफ सफाई पर भी ध्यान दिया गया इसके लिए छोटे-छोटे नगर परिषद का गठन किया गया तथा सफाई कर्मचारियों को भी नियुक्त किया गया

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